Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
शुष्यतः कायसरसः प्रगलद्यौवनाम्भसः ।
राजहंसः क्षणादायुरनिवर्ति पलायते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सूख रहे सरोवर से राजहंस तत्क्षण भाग जाता है, फिर कभी नहीं लौटता, वैसे ही
यौवनरूपी जल जिसमें से नष्ट हो रहा है, ऐसे सुख रहे शरीररूपी सरोवर से आयु भाग जाती हे, पुनः
कभी नहीं लोटती