Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अवमानरजोध्वस्तमस्तंगतवपुःश्रियम् ।
मुखं धूसरतामेति हिमैः पद्ममिवाहतम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कुहरे से आहत (आक्रान्त) कमल धूसर (मटमेला) हो जाता हे, वैसे ही वृद्धावस्था में पुत्र, चाकर
आदि के द्वारा जनित अपमानरूपी धूलि से आहत, शारीरिक शोभा से वर्जित मुख धूसर हो जाता
है