Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नीरसा निःसुखा लघ्वी पतत्पेलवगात्रिका ।
जीर्णपर्णसवर्णेयं क्षीयते दिवसावली ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जीर्ण-शीर्ण पत्ते के सदुश, रसशून्य, सुख से वर्जित दिवसों से परिच्छिन्न यह तुच्छ शरीर
लता जिसके अवयव क्षय, दुर्बलता, रोग आदि से कार्य में असमर्थ हो गये हैं वह नष्ट हो जाती है