Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
जिह्वाचपलतालग्नः कायद्रुममहालये ।
पतच्चिन्तामणौ वृद्धो गर्द्धगृध्रो विवर्धते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
जिससे परम पुरुषार्थ का हेतुभूत आयुरूप चिन्तामणि तथा विवेकरूप
चिन्तामणि व्यर्थ गिर रहा है, ऐसे शरीर वक्ष के ऊपर अवस्थित हृदयरूपी बड़े घोंसले में रहनेवाला
जीभ की चंचलता में संलग्न अत्यन्त प्राचीन स्वादु अन्न आदि में अभिलाषारूपी गीध बढता ही रहता
हे