Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अस्य संसारतन्त्रस्य बृहत्कालविलास्पदः ।
जीविताशामयं तन्तुमन्तकाखुर्निकृन्तति ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
तन्त्र के (ताँतों के) जीवन आशा से भरे आयुरूपी तन्तु को महान् कालरूपी बिल में रहनेवाला मृत्युरूप
चूहा सदा कतरता रहता है