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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

अनन्ता बन्धुजनतानद्यो गम्भीरकोटरे । अजस्रं निपतन्त्येता वितते कालसागरे ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

ये बन्धुजनो के समूहरूपी असंख्य नदियाँ गम्भीर कोटरवाले विशाल काल सागर में निरन्तर गिरती रहती हैँ