Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

बहुविधसुखदुःखमध्यपाती विततजरामरणप्रवातभग्नः । जगदुदरगिरौ लुठञ्जनोऽयं गतरसपर्णवदेति जर्जरत्वम् ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

सब जन्मो में दुःख के स्थान अनेक हैं, यो बतला रहे महानुभाव भास प्रकृत विषय का उपसंहर करते हैं। अनेकविध सुख और दुःखों के बीचमें पड़ा हुआ, विशाल जरामरणरूपी आँधी से बार-बार मर्दित हुआ तथा जगत्‌-रूपी उदयाचल पर लोट रहा यह प्राणी सुखे पत्ते की नाईं जर्जरता को प्राप्त होता है