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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवं तौ कुशलप्रश्नं कृतवन्तौ परस्परम् । कालेनासाद्य विमलं ज्ञानं मोक्षं ततो गतौ ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामचन्द्रजी, उन दोनों ने उस प्रकार संसार की असारता के विचार से ओतप्रोत कुशल प्रश्न एक दूसरे से किया तदनन्तर समय आने पर विशुद्ध ज्ञान पाकर वे दोनों मुक्त हो गये

सर्ग सन्दर्भ

छासठवाँ सर्ग समाप्त सड़सठवाँ सर्ग देह और आत्माका सम्बन्ध नहीं है, इसका समर्थन करने के लिए बन्धन अन्तःकरण की आसक्ति से होता है ओर अन्तःकरण की आसक्ति के त्याग से उसका विनाश हो जाता है, यह कथन |