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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

ततो वच्मि महाबाहो यथा ज्ञानेतरा गतिः । नास्ति संसारतरणे पाशबन्धस्य चेतसः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महाबाहो, इसलिए मैं कहता हूँ कि जाल के समान बन्धन के हेतुओं से परिपूर्ण चित्त को संसार-तरण में यथार्थ आत्मज्ञान के सिवा और दूसरा कोई उपाय नहीं है