Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
विलास उवाच ।
जीविताग्र्यद्रुमफल हृदावासामृताम्बुधे ।
जगत्यस्मिन्महाबन्धो भास स्वागतमस्तु ते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
विलास ने कहा : हे मेरे उत्तम जीवनरूपी वृक्ष के फल, हे मेरे हृदय में सदा सर्वदा रहनेवाले अमृत
के सागर (चन्द्रमा) ओर हे इस जगत् के महाबन्धो भास ! आपका स्वागत हो