Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
दारुसंश्लेषितात्तोयात्कम्पशब्दादयो यथा ।
प्रजायन्ते तथैवास्माद्देहाच्चित्परिबोधितात् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे काठ के साथ सम्बन्ध को प्राप्त जल से
कम्प, शब्द आदि क्रियाओं की उत्पत्ति होती है, वैसे ही सामीप्य संसर्ग से चैतन्य के द्वारा अधिष्ठित
होकर चारों ओर से बोधित इस देह से कम्प, शब्द आदि क्रियाएँ होती हैं