Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
दारुवार्युपलास्फोटे दुःखिता न यथा क्वचित् ।
संयुक्तेषु वियुक्तेषु न तथा पञ्चसु क्षतिः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे परस्पर आहत होने पर काठ,
जल और पत्थर कभी भी दुःखित नहीं होते, वैसे ही पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाशरूपी पाँच
भूतों के, जो देह आदि के स्वरूप में परिणत हुए हैं वे कोडा, चन्दन आदि से संयुक्त अथवा स्त्री, पुत्र
आदि से वियुक्त होने पर कभी दुःखित नहीं होते