Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यथा दर्पणवीच्यादौ प्रतिबिम्बानि वस्तुतः ।
नासत्यानि च सत्यानि शरीराणि तथात्मनः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दर्पण, तरंग आदि में पड़े हुए
प्रतिबिम्ब वास्तव में न सत्य हैं और न असत्य हैं, किन्तु अनिर्वचनीय हैं, वैसे ही आत्मा में प्रतीयमान
शरीर भी न सत्य है और न असत्य है, किन्तु अनिर्वचनीय हैं