Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यथा न कस्यचिद्वारिदारुश्लेषेऽनुभूतयः ।
तथा न कस्यचिद्देहदेहिसङ्गेऽनुभूतयः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे काठ और जल का सम्पर्कं होने पर उनमें से किसी को सुख ओर दुःख का अनुभव नहीं
होता, वैसे ही देह ओर ओर देहाभिमानी आत्मा का सम्बन्ध होने पर उनमें से किसी को भी सुख, दुःख
आदि का अनुभव नहीं होता है