Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अदुःखमेति दुःखित्वमन्तःसंवेदना स्फुटम् ।
स्फारो भवति वेतालो वेतालत्वेन भावितः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो असत् है, उसका भी भरान्तिवश अस्तित्वरूप से भान होता है, यह कहते हैं।
जैसे वेतालरूप से भावना करने पर अवेताल वस्तु भी विशाल वेताल स्वरूप हो जाती है, वैसे ही
दुःखशून्य चैतन्यरूप आत्मा भी अन्तःकरण मेँ दुःख भावना करने से स्पष्ट दुःखित्वरूप से भासने
लगता है