Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 67, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
संबन्धः क इव श्रीमन् शैलापरसमुद्रयोः ।
अन्तरे गिरिसंबाधे कश्च चित्तत्त्वबन्धयोः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जिस प्रकार बीच-बीच में अनेक पर्वतों से व्याप्त होने पर भी उत्तर पर्वत और दक्षिण
समुद्र का परस्पर कोई सम्बन्ध नहीं है, वैसे ही परमात्मा और संसार का भी पस्पर कोई सम्बन्ध नहीं
है। क्या कहीं आकाश रज्जू से वोधा जा सकता है ?