Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 68, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
नानापारयुगावर्तदुःखालोकनकर्कशम् ।
न लुनाति मनःखण्डं दुःखिगीर्वाणमण्डलम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के कर्तृत्व न होने पर आत्मा का अकर्तापन स्पष्टरूप से सिद्ध हो जाता है,
क्योकि शून्यचित्त पुरुष कर्ता होते हुए भी अभिमान नहीं करता