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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 68, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

वासनामात्रवशतः परे व्योमनि केनचित् । इदमारचितं चित्रं विचित्रं पश्य राघव ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं कर्म के प्रति कारण नहीं है क्योकि चित्त में कर्तृत्व शक्ति नहीं हे, यह बात नहीं हे, अतएव चित्त की कर्तृत्वशक्ति से ही सब कर्मो की स्थिति हो जायेगी, फिर देह में कर्तृत्व मानने की कोई आवश्यकता नहीं हे