Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अकुर्वन्नपि कुर्वाणो जीवः स्वात्मरतिः क्रियाः ।
क्रियाफलैर्न संबन्धमायाति खमिवाम्बुदैः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
अब आसक्ति से होनेवाले परिणामों का विस्तारपूर्वक निरूपण करते है ।
भद्र, आसक्ति से विस्तार को प्राप्त हुई समस्त दुःखराशियाँ गङ़ में उत्पन्न काँटे वाले वृक्षों की
नाईं हजारों शाखा-प्रशाखाओं में फैल जाती हैं