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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

तत्रस्थो विगतासङ्गो जीवोऽजीवत्वमागतः । व्यवहारमिमं सर्वं मा करोतु करोतु वा ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तीन प्रश्नों का समाधान कर चतुर्थ प्रश्न का समाधान करते हैं। हे राघव, संसक्ति के अभाव से अनेक तरह के फलानुरागो द्वारा उत्पन्न हुई निखिल दुष्ट चेष्टाएँ विनष्ट हो जाती हैं ओर श्रवण आदि शुभ चेष्टाएँ निर्विघ्नतापूर्वक कल्याण का सम्पादन करती रहती हैं