Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 16
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हिन्दी अर्थ
पुण्य ओर पाप के अधिकारी ये जन-समूह ध्वस्त -विध्वस्त
होकर बार बार जन्म धारण कर रहे कृमि ओर कीट भाव को जो प्राप्त होते हँ, वह संसृतिकेफल का
विस्तार है