Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 15
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हिन्दी अर्थ
दूब, कोपलों ओर
तिनको का आहार करनेवाला मृग भीलों के बाणों की पीडा से अपनी देह को जो छोड देता है, वह भी
आसक्ति के फल का विस्तार है