Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 14
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हिन्दी अर्थ
क्षुधा से जिसकी पाँख कृश हो गई है तथा जिसकी बुद्धि बाण,
पत्थर, मिट्टी के ढेले आदि के अभिघात से भय ग्रस्त हो गई हे, ऐसा वृक्ष की शाखाओं पर शयन कर रहा
पक्षी अपनी आयु को जो खपाता है, वह आसक्ति के फल का विस्तार है