Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
आत्मा के स्वरूपज्ञानरूप हेतु के द्वारा यथार्थ ओर अयथार्थ
वस्तु के (नित्यानित्यवस्तु के) विवेक से उत्पन्न हुई, अबाध्य आत्मतत्त्व का अवलम्बन करनेवाली जो
पुनःसंसार से शून्य आसक्ति है, वह वन्द्या आसक्ति कही जाती है