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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 22

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

आत्मतत्त्वज्ञान से रहित, देह आदि असत्य वस्तुओं से जनित जो अत्यन्त दृढ़ यानी चिरकाल से भावित पुनः पुनः संसार मेँ आसक्ति है, वह वन्ध्या आसक्ति कही जाती है