Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 21
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हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, आसक्ति दो प्रकार की कही गई है एक वन्द्या (वंदनीय) यानी प्रशस्त
ओर दूसरी वन्ध्या यानी पुरुषार्थ फल से शून्य । इनमें पहली वन्द्या आसक्ति खुद तत्त्वज्ञ महात्माओं की
है ओर दूसरी वन्ध्या सर्वत्र प्रसिद्ध समस्त अज्ञानियों की है