Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 20

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अपनी अनर्थ परम्पराओं के अनुरूप वियोग, भ्रान्ति, पतन आदि हजारों विक्षेपो के हेतु असंख्य बाह्य ओर आभ्यन्तर पदार्थो से परिपूर्ण यह संसाररूपी नदी जो बढ़ने पाई है, वह भी संसक्तिके फल का विस्तार हे