Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 33
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हिन्दी अर्थ
हे रामजी, समुद्र में तरंगों की नाई ये असंख्य भूत जो उत्पन्न होते हैं, मरते हैं, गिरते हैं उठते हैं,
यह भी संसक्ति का विलास है