Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 32
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
संसक्ति के प्रभाव से ब्रह्माण्डरूपी गूलर के फल में
मच्छरों की नाई अपना अपना व्यवहार कर रहे देवता स्वर्ग में, मनुष्य पृथ्वी मे, सर्प ओर असुर पाताल
में अवस्थित हैं