Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 31
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हिन्दी अर्थ
मुक्त और अमुक्त दोनों के सारे व्यवहार संसक्ति से ही होते हैं, यों विस्तारपूर्वक बतलाते हैं।
संसक्ति के प्रभाव से वायु समस्त भुवनों के कोटरों में बहता है, पाँच भूत अपने अपने स्वरूप में
रहते हैं और यह जगत्-स्थिति चलती है