Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 37
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हिन्दी अर्थ
कभी उदय तो
कभी अस्त, कभी वृद्धि तो कभी हास, कभी उत्थान तो कभी पतन इस विविध दशाओं से सदा ही
शिथिलः कालरूपी बालक के गेंद रूप; जडतायुक्त; जलमय तथा अनेकविध कलंकों से म्लान चन्द्र
का शरीर यद्यपि इन बहुविध दोषों के कारण परित्याग करने योग्य है, तथापि आज तक जो वह नहीं
छोड़ता, यह संसक्ति का ही परिणाम है