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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verses 38–39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verses 38–39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 38

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अनेक तरह के अपार युगावर्तो के दुःखानुभव से कठोर हुए मनोरूपी छेदनयोग्य व्रणविशेष के दुःख से दुःखी इन्द्र आदि देवगण भी जो उच्छेदन द्वारा उसकी चिकित्सा नहीं करता, वह भी संसक्ति का फल है