Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 50
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हिन्दी अर्थ
हे रामजी, भीतरी
आसक्ति शरीरो के लिए अंगारे है ओर भीतरी आसक्ति का परित्याग अंगों के लिए उत्तम रसायन है,
यह आप जानिए