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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 51

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 51

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अवलम्बन के लिए तृणविशेषों को चाहनेवाली लता जैसे अवलम्बित तृणो से जनित अग्नि से दग्ध हो जाती है, वैसे ही अन्दर में अवस्थित संसक्तिरूपी अग्नि से प्रकृतिभूत जीव भी दग्ध हो जाता हे