Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 52
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हिन्दी अर्थ
यहाँ प्रकृति के कार्य देह आदि के साथ जीव का सम्बन्ध होने के कारण जीव प्रकृति" कहा गया है ।
आसक्ति से शून्य अतएव आकाश के समान निर्मल-स्वरूप से अवस्थित, चारों ओर से शान्त,
असत् के सदुश, सत् के समान भासमान मन सर्वत्र सुख का ही हेतु है