Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 53

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

विद्या विषय में उत्तम उदय हो प्राप्त हुए यानी प्रबद्ध हुए अविद्या विषय में (प्रपंच में ) क्षय को प्राप्त हुए यानी अनुसन्धान से शून्य हुए तथा सर्वत्र दृश्यवस्तुओं मे आसक्ति से वर्जित हुए अपने अन्तःकरण से जो पुरुष सदा- सर्वदा अवस्थित रहता है, वही पुरुष जीवन्मुक्त कहलाता हे