Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 70, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
चित्तमात्मत्वमायातं सुखदुःखानुरञ्जनम् ।
नोपैति रङ्गसंयुक्तो मसृणः स्फटिको यथा ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
न कार्य वर्ग में, न स्थिरकारण
अव्यक्त में, न सृष्टि के आदि कालमें, न मध्य काल में, न अन्तकाल में, न दूर में, न समीप में न सामने,
न नामरूपात्मक पदार्थ में और न जीव में मन को आसक्त करना चाहिए