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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 70, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

आत्मारामा महात्मानः प्रबुद्धाः परमोदयाः । बहिः पिच्छाग्रतरला अन्तर्मेरुरिवाचलाः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

न जाग्रत्‌ में, न स्वप्न में, न सुषुप्ति में, न शुद्ध सत्वगुण में, न तमोगुण में न पीतरक्त आदि रजोगुण में और न गुणों के समाहार में मन को आसक्त करना चाहिए