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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 16

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

अयं सोऽहमिति प्राज्ञ क्व करोषि व्यवस्थितिम् । किं तत्त्वं किं च वा ते स्यात्किं तत्त्वं किं च वा न ते ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्व से ही यानी साधन अवस्था से ही लेकर अभिनिवेश का परित्याग कर कर्मो का अनुष्ठान कर रहा निर्विकार बुद्धिवाला जीव जीवन्मुक्त-स्वरूप से अवस्थित रहता है और उन कर्मो के फलों से बद्ध नहीं होता