Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
सुखी दुःखी विमूढोऽस्मीत्येता दुर्दृष्टयः स्मृताः ।
आसु चेद्वस्तुबुद्धिस्ते तच्चिरं दुःखमिच्छसि ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि उस प्रकार की लीला का अनुभव कर रहा ज्ञानी उस जगत् मे फिर आसक्त भी तो
हो जायेगा ? तो नहीं ऐसा प्रकार समाधान करते हैं।
हे श्रीरामजी, जिसके शोक, भय एवं अन्यान्य सांसारिक मिथ्या प्रपंच सदा के लिए निवृत्त हो गये
हैं तथा जो संसाररूपी विभ्रम से वर्जित है ऐसा तुर्यावस्था में सदा-सर्वदा आसीन हुआ आत्मज्ञानी फिर
इस संसार चक्र में कभी भी गिरता नहीं है