Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 71, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
यः क्रमः शैलतृणयोः कौशेयोपलयोस्तथा ।
साम्यं प्रति स एवोक्तः परमात्मशरीरयोः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
क्यो संसार में नहीं गिरता ? इस प्रश्न पर कहते हैं।
पर्वत पर चढ़ा हुआ धीर पुरुष पर्वत को हरा भरा यानी दूर से पर्वत को अत्यन्त सुन्दर समझनेवाले
भ्रमग्रस्त नीचे के प्रदेश में अवस्थित पुरुष को देखकर जैसे हँसता है, वैसे ही वह ज्ञानी अपनी पुण्यमयी
तुर्य स्थिति को प्राप्त कर जैसे यह भ्रमित जगत् है, उसको दोष दृष्टि से देखकर हँसता है, पुरुषार्थ बुद्धि
से नहीं