Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
यः कुण्डबदरन्यायो या घटाकाशसंस्थितिः ।
तत्रैकस्मिन्क्षते क्षीणे द्वे इति व्यर्थकल्पना ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, जैसे वायु-प्राप्प आकाश पुरुषों का प्राप्य विषय नहीं है, वैसे ही इससे ऊपर का
तुर्यातीत पद यद्यपि विदेह मुक्तो का प्राप्य है, तथापि जीवन्मुक्त ओर वेदवचनों का अधिकृत या
प्रतिपाद्य विषय नहीं है, क्योकि विषयता के सम्पादक मन का उस अवस्था में विनाश हो चुका है