Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
विनाशिनि विनष्टेऽस्मिन्देहे स्वां स्थितिमागते ।
विनश्यामीति यः खेदी तं धिगस्त्वन्धचेतसम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाशवीथी (मार्ग) वायुओं को प्राप्त हे, वैसे ही दूर से भी अति दूर यानी अत्यन्त दुरधिगम्य
उक्त विश्रान्तिस्थान (तुर्यातीतपद) विदेहमुक्त पुरुषों का प्राप्य है