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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

एवं च याति तुर्यत्वमेवं मुक्तिरिति स्मृता । दृश्यदर्शनमुक्तायां युक्तायां परया धिया ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे सर्वत्र अवस्थित आकाश दर्पण में प्रतिबिम्बित होता है, वैसे ही सर्वत्र अवस्थित आत्मा चित्त में दिखाई पडता है