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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

दृश्यदर्शननिर्मुक्ता तामालम्ब्य भवाभवः । सौषुप्ती दृष्टिरेषा हि यात्येवं संप्रकाशते ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

जहाँ पुष्प रहता है, वहीं पर जैसे गन्ध की संवित्‌ (ज्ञान) रहती है, वैसे ही जहाँ चित्त होता है, वहीं पर आत्मा की संवित्‌ रहती है