Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
क्षयातिशयमुक्ता चेत्तन्मुक्तिः सोच्यते बुधैः ।
दृश्यदर्शनसंबन्धे यानुभूतिः स्वगोचरा ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव चित्त के गमन से ही आत्मा का परलोक में गमन आदि व्यवहार भी होता है, ऐसा कहते है।
शरीररूपी आलय को छोडकर जहाँ चित्तरूपी पक्षी अपनी वासना के अनुसार जाता है, वहीं पर
आत्मा अनुभूत होता है