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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

तदृश्यवलितं बन्धस्तन्मुक्तं मुक्तिरुच्यते । दृश्यदर्शनसंबन्धसुखसंविदनामया ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

यद्यपि वह सर्वगत और नित्य है, तथापि चित्त और उसकी वृत्तियों मे ही अभिव्यक्त होती है, अन्यत्र नहीं ऐसा कहते है । यद्यपि आकाश, पत्थर, दीवार आदि सर्वत्र स्थानों मेँ आत्मा की स्थिति (सत्ता) विद्यमान है, तथापि दर्पण में प्रतिबिम्ब की नाई इस चित्त में ही वह दीखाई पडती है