Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
न चेतनो न च जडो न चैवासन्न सन्मयः ।
नाहं नान्यो न चैवैको नानेको नाप्यनेकवान् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सूर्य की प्रभा आलोक का विस्तार करती है, वैसे ही अन्तःकरण में प्रतिबिम्बित्
आत्मसंवित् व्यावहारिक और प्रातिभासिक जगत्-स्वरूप का विस्तार करती है