Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
नाभ्याशस्थो न दूरस्थो नैवास्ति न च नास्ति च ।
न प्राप्यो नाति चाप्राप्यो न वा सर्वो न सर्वगः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
अतः भूतोंकी
उत्पत्ति में (संसृति में) अन्तःकरण यानी समष्टि आत्मा हिरण्यगर्भ ही कारण है, आत्मा तो समस्त
पदार्थो से परे है, इससे प्रतिबिम्ब द्वारा भूतोत्पत्ति में कारण होते हुए भी आत्मा स्वतःकारण नहीं है