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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

गतेतरेतरापेक्षः सरःपङ्कामलाम्भसाम् । यथा राघव संबन्धस्तथा देहेन्द्रियात्मनाम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

तुयातीत पद में जब तक विश्रान्ति प्राप्त न हो जाय, तब तक ज्ञान की दृढ़ता करनी चाहिए, न कि केवल मध्यवर्ती भूमिकाओं में विश्रान्ति प्राप्त हो जाने तक ज्ञान की दढता करनी चाहिए, यो कहते है। हे रघुनायक, जिस प्रकार तुर्यातीत पद का परिज्ञान रखनेवाले आत्मतत्त्वज्ञानी महात्मा तुर्यातीत पद को प्राप्त होते हैं, उसी प्रकार आप भी सुख-दुःखादि द्रनद्रो से विनिर्मुक्त होकर उस परम पद को प्राप्त कीजिए